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50 हजार का इनामी डकैत एसटीएफ के हत्थे चढ़ा बाइक, गांजा और तमंचा बरामद

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बाराबंकी, लखनऊ और फर्रूखाबाद में डाली थी डकैती
हिन्दू अमन मिश्रा  रिपोर्ट

गैंग के लीडर सहित कई साथी पहले ही पकड़े जा चुके हैं
लखनऊ, 24 फरवरी।
बाराबंकी, लखनऊ और फर्रूखाबाद जनपद में कुछ समय पहले ताबड़तोड़ डकैती की घटनाओं को अंजाम देने वाले 50 हजार रुपये के इनामी डकैत राजकिशोर बहेलिया उर्फ काले प्रधान को बीती रात यूपी एसटीएफ ने गाजियाबाद जनपद से गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से एक तमंचा, 5 किलो गांजा और एक बाइक भी मिली है। 
वर्ष 2017 और 2018 को बाराबंकी, लखनऊ और फिर फर्रूखाबाद जनपदों में कई डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। इन घटनाओं में तीन लोगों की हत्या की गयी थी और कई लोग घायल भी हुए थे। 3 फरवरी 2018 को पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में बावरिया गैंग के चार बदमाशों राजेश उर्फ  पेटला, मनोज उर्फ  छोटू उर्फ  राकेश, राजू उर्फ  रमेश और  महेन्द्र पकड़े गये थे। पकड़े गये बदमाशों से की गयी पूछताछ में बाराबंकी, लखनऊ व फर्रूखाबाद की डकैती की घटनाओं में इस गैंग का सम्मिलित होना पाया गया। इन घटनाओं में गैंग सरगना विनोद को एसटीएफ ने 7 फरवरी 2018 को और डकैत दयाराम बावरिया को  25 मई 2018 को  गिरफ्तार किया था। इसके बाद गैंग के एक लाख रुपये के ईनामी अपराधी राकेश उर्फ  किशन उर्फ  कालिया उर्फ  राजू निवासी राजस्थान को 15 सितम्बर को पकड़ा गया था। इसके बाद गैंग के  50 हजार के इनामी दीपक बावरिया निवासी दिल्ली को गिरफ्तार किया था। डकैतों के इस गैंग में दिल्ली निवासी राजकिशोर फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। बीती रात यूपी एसटीएफ ने मुखबिर और सर्विलांस की मदद से 50 हजार रुपये के इनामी डकैत राजकिशोर को गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके से गिरफ्तार किया। उसके पास से एक बाइक, पांच किलो गांजा और एक तमंचा मिला।
17 साल की उम्र से कर रहा है अपराध
पूछताछ के दौरान 55 वर्षीय राजकिशोर बहेलिया ने बताया कि उसका मूल निवास ग्राम आजादनगर बानपोई, थाना मोहम्मदाबाद जनपद फर्रूखाबाद है तथा वह 17 वर्ष की आयु से ही अपने गॉव के गैंग के सदस्यों के साथ अपराध कर रहा था।  घटनाओं को अंजाम देनेे के लिए कार, मोटर साइकिल व व्यावसायिक वाहनों का प्रयोग भी करता है। पूर्व मेें ट्रकों और ट्रैक्टर पर सवार होकर कई बड़ी-बड़ी डकैती की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। आरोपी ने बताया कि वर्ष 2000 में वह पुलिस के डर से यूपी छोड़कर मध्य प्रदेश भाग गया था और भिण्ड, मुरैना मेें कई डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया था। भिण्ड, मुरैना में जब गिरोह के कई सदस्य पकड़े गये तो वह अपने कुछ साथियों को साथ लेकर दिल्ली आकर रहने लगा और यहीं पर उसका सम्पर्क अलवर राजस्थान के विनोद बावरिया से हुआ, इसके बाद इन लोगों ने बाराबंकी,लखनऊ और फर्रूखाबाद जनपद में डकैती की कई घटनाओं को अंंजाम दिया। पकड़े गये डकैत के खिलाफ यूपी के अलग-अलग जनपदों में 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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