राजकोष की लूट रोकने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लिया जायेगा
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माननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ।
महोदय,
कृपया आपके ध्यान मे लाने एवं उर्पयुक्त कार्यवाही तथा कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा व वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा की एसटीएफ अथवा विजलेंस से जांच कराये जाने के सम्बन्ध मे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा कार्यालय की मिलीभगत से दिनांक 14.12.2009 को तत्कालीन जिला प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा, विकलांग कल्याण अधिकारी गोण्डा श्री बी० डी० वर्मा महोदय द्वारा फर्जी डिस्पैच पंजिका बनाकर दर्जनों कथित शिक्षको का अनियमित वेतन एरियर भुगतान परिषदीय अध्यापकों का स्थानातरण व निलंबित शिक्षको की बहाली की गई।
सम्पूर्ण प्रकरण कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा के संज्ञान मे आने के उपरांत भी राजकोष की लूट रोकने का कोई प्रयास आज तक नहीं किया गया। पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा डा० फतेह बहादुर सिंह के पत्रांक: बे०शि०/1454-58/2016-17 दिनांक 26.05.2016 मे लिखा है कि कार्यालय के डिस्पैच पंजिका मे दिनांक 14.12.2009 मे 7189-90 चल रहा था।
प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा श्री बी० डी० वर्मा ने फर्जी डिस्पैच पंजिका बनाकर दिनांक 14.12.2009 को 29-32 आदि जैसे पत्रांक के आधार पर लाखो रुपये का राजकोष से अनियमित भुगतान कराकर शासकीय धन की लूट कराईं।
यक्ष प्रश्न है कि जब वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा कार्यालय मे प्रत्येक कार्य दिवस मे पत्र व्यवहार होता है तो क्या तत्कालीन लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा को फर्जी डिस्पैच पंजिका के पत्रांक पर बिना ध्यान दिये ही लाखो रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान हो गया अथवा लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा कार्यालय भी पूरी तरह से भुगतान मे शामिल था और आज भी है। प्रश्न यह है कि जब भ्रष्ट अधिकारी भ्रष्टाचार के कार्यो मे संलिप्त होने के उपरांत भी आराम से बच कर निकल जाते है, और फिर दूसरे अधिकारी भी उसी नक्शे कदम पर चल कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते है।
ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो को दलाल के माध्यम से राजनितिक संरक्षण भी प्राप्त होता है, इसी विभाग मे एक दलाल है जो सफेद वस्त्र धारण कर सफारी और फार्च्यूनर जैसे लग्जरी वाहनो का प्रयोग करते हुए दिखाई देते है।
दलाल महोदय को मै भी पूर्व BSA गोण्डा के साथ हाईकोर्ट के गेट नम्बर (3) पर टाटा सफारी से देखा है। सब कुछ 14.12.2009 का दिया हुआ है।
श्रीमान जी यदि सरकार/शासन ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो पर कार्यवाही करने मे असक्षम है तो राजकोष की लूट रोकने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लिया जायेगा।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ।
महोदय,
कृपया आपके ध्यान मे लाने एवं उर्पयुक्त कार्यवाही तथा कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा व वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा की एसटीएफ अथवा विजलेंस से जांच कराये जाने के सम्बन्ध मे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा कार्यालय की मिलीभगत से दिनांक 14.12.2009 को तत्कालीन जिला प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा, विकलांग कल्याण अधिकारी गोण्डा श्री बी० डी० वर्मा महोदय द्वारा फर्जी डिस्पैच पंजिका बनाकर दर्जनों कथित शिक्षको का अनियमित वेतन एरियर भुगतान परिषदीय अध्यापकों का स्थानातरण व निलंबित शिक्षको की बहाली की गई।
सम्पूर्ण प्रकरण कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा के संज्ञान मे आने के उपरांत भी राजकोष की लूट रोकने का कोई प्रयास आज तक नहीं किया गया। पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा डा० फतेह बहादुर सिंह के पत्रांक: बे०शि०/1454-58/2016-17 दिनांक 26.05.2016 मे लिखा है कि कार्यालय के डिस्पैच पंजिका मे दिनांक 14.12.2009 मे 7189-90 चल रहा था।
प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा श्री बी० डी० वर्मा ने फर्जी डिस्पैच पंजिका बनाकर दिनांक 14.12.2009 को 29-32 आदि जैसे पत्रांक के आधार पर लाखो रुपये का राजकोष से अनियमित भुगतान कराकर शासकीय धन की लूट कराईं।
यक्ष प्रश्न है कि जब वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा कार्यालय मे प्रत्येक कार्य दिवस मे पत्र व्यवहार होता है तो क्या तत्कालीन लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा को फर्जी डिस्पैच पंजिका के पत्रांक पर बिना ध्यान दिये ही लाखो रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान हो गया अथवा लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा गोण्डा कार्यालय भी पूरी तरह से भुगतान मे शामिल था और आज भी है। प्रश्न यह है कि जब भ्रष्ट अधिकारी भ्रष्टाचार के कार्यो मे संलिप्त होने के उपरांत भी आराम से बच कर निकल जाते है, और फिर दूसरे अधिकारी भी उसी नक्शे कदम पर चल कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते है।
ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो को दलाल के माध्यम से राजनितिक संरक्षण भी प्राप्त होता है, इसी विभाग मे एक दलाल है जो सफेद वस्त्र धारण कर सफारी और फार्च्यूनर जैसे लग्जरी वाहनो का प्रयोग करते हुए दिखाई देते है।
दलाल महोदय को मै भी पूर्व BSA गोण्डा के साथ हाईकोर्ट के गेट नम्बर (3) पर टाटा सफारी से देखा है। सब कुछ 14.12.2009 का दिया हुआ है।
श्रीमान जी यदि सरकार/शासन ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो पर कार्यवाही करने मे असक्षम है तो राजकोष की लूट रोकने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लिया जायेगा।


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