केंद्रीय ट्रेडयूनियन, स्वतंत्र फेडरेशन और एसोशिएशन द्वारा आहूत कामगारों की 8-9 जनवरी की आम हडताल को राकांपा का पूर्ण समर्थन।
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श्रम कानूनों को मजबूत करो, रेल सुरक्षा बीमा एवं अन्य सार्वजनिक क्षेत्रो पर विदेशी निवेश पर रोक लगाओ - डॉ. रमेश दीक्षित ।
निजीकरण , छटनी-कटनी और और बेरोजगारी बढ़ाने वाले श्रम कानूनों को तत्काल रोक लगायी जाये-डॉ रमेश दीक्षित ।
सार्वजनिक क्षेत्रो को मजबूत करो , और सभी मजदूरो को सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की गारेंटी करे सरकार - डॉ. रमेश दीक्षित ।
सभी जिला इकाइयों/ महानगर इकाइयों को हड़ताल सफल बनाने के लिए निर्देश जारी-डॉ. रमेश दीक्षित ।
लखनऊ, 5 जनवरी 2019 । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने आगामी 8-9 जनवरी को देश की केंद्रीय ट्रेड यूनियन , फ़ेडरेशनो के आह्वान पर की जाने वाले देशव्यापी आम हड़ताल को पूर्ण समर्थन दिया है । राकांपा ने बढती महंगाई , बेरोजगारी और श्रम कानूनों को लगातार ढीला करने वाली नीतियों के खिलाफ कामगारों की हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए इसको शत प्रतिशत सफल बनाने की अपील भी आम जनता से की ।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने केंद्रीय ट्रेडयूनियंस और स्वतंत्र फेडरेशन द्वारा कॉल की गयी आम हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए पार्टी के ज़िला इकाइयों / महानगर और ब्लाक स्तर की इकाइयों को इस आमहड़ताल को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी किये है । डॉ. दीक्षित ने कहा कि सभी इकाईओं को झंडा , बैनर , नुक्कड़ मीटिंग्स द्वारा वाल चाकिंग द्वारा हड़ताल को सफल बनाने में जुट जाने को कहा ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि सरकार की जनविरोधी ,मजदूर विरोधी तथा देशविरोधी नीतियों न सिर्फ श्रमिको पर बोझ डाला है बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और चमचे कार्पोरेट के हित में देश की अर्थव्यवस्था की नींव ही उखाड़े दे रही है। देश की उत्पादन क्षमता कम हो रही है , बेरोजगारी और महंगाई अपने चरम पर है । जनहित की नीतियाँ अमल में लाने के लिए आम जनता को श्रमिक संगठनो द्वारा आहूत की गयी राष्ट्रव्यापी हड़ताल/ कार्यबहिष्कार को सफल बनाना ही होगा ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि मौजूदा सरकारें सार्वजनिक क्षेत्रो की इकाइयों और अंडरटेकिंग पर विदेशी निवेश पर रोक लगाये । मौजूदा श्रम कानूनों को शिथिल बनाने की बजाये उनको कामगार हितेषी बनाये जाए ताकि ताकि कामगार के हित सुरक्षित रह सके । ठेका पद्दति , छटनी कटनी , वर्क जॉब बेसिस पर तत्काल रोक लगे । उन्होंने आगे कहा कि आंगनबाड़ी , आशा वर्कर्स , मिड डे स्काहित सभी स्कीम के तहत काम कर रहे कामगारो को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाये । श्रमिको की सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकारों का फर्ज है उनको किसी भी कीमत पर शिथिल न करके उसे और मजबूत बनाया जाये । सार्वजनिक वितरण प्रणाली सबके लिए सुलभ बनाकर महंगाई पर रोक लगाना सुनिश्चित करे । श्रम कानूनों में संसोधन बंद करे और सभी श्रमिक विरोधी संसोधन वापस ले । बेरोजगारी उन्मूलन के लिए राष्ट्रव्यापी रोजगारपरक नीतियों को निर्माण करे सरकार ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने आगे कहा कि कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल को वापस लेना , इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है। विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली ,समान कार्य के लिए समान वेतन , ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों हेतु संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए तेलंगाना की तरह नियमित करना , बिजली सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रो का निजीकरण पूरी तरह बंद करना और प्राकृतिक संसाधनों को निजी घरानों को सौंपना बंद करना मुख्य हैं |
श्रम कानूनों को मजबूत करो, रेल सुरक्षा बीमा एवं अन्य सार्वजनिक क्षेत्रो पर विदेशी निवेश पर रोक लगाओ - डॉ. रमेश दीक्षित ।
निजीकरण , छटनी-कटनी और और बेरोजगारी बढ़ाने वाले श्रम कानूनों को तत्काल रोक लगायी जाये-डॉ रमेश दीक्षित ।
सार्वजनिक क्षेत्रो को मजबूत करो , और सभी मजदूरो को सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की गारेंटी करे सरकार - डॉ. रमेश दीक्षित ।
सभी जिला इकाइयों/ महानगर इकाइयों को हड़ताल सफल बनाने के लिए निर्देश जारी-डॉ. रमेश दीक्षित ।
लखनऊ, 5 जनवरी 2019 । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने आगामी 8-9 जनवरी को देश की केंद्रीय ट्रेड यूनियन , फ़ेडरेशनो के आह्वान पर की जाने वाले देशव्यापी आम हड़ताल को पूर्ण समर्थन दिया है । राकांपा ने बढती महंगाई , बेरोजगारी और श्रम कानूनों को लगातार ढीला करने वाली नीतियों के खिलाफ कामगारों की हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए इसको शत प्रतिशत सफल बनाने की अपील भी आम जनता से की ।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने केंद्रीय ट्रेडयूनियंस और स्वतंत्र फेडरेशन द्वारा कॉल की गयी आम हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए पार्टी के ज़िला इकाइयों / महानगर और ब्लाक स्तर की इकाइयों को इस आमहड़ताल को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी किये है । डॉ. दीक्षित ने कहा कि सभी इकाईओं को झंडा , बैनर , नुक्कड़ मीटिंग्स द्वारा वाल चाकिंग द्वारा हड़ताल को सफल बनाने में जुट जाने को कहा ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि सरकार की जनविरोधी ,मजदूर विरोधी तथा देशविरोधी नीतियों न सिर्फ श्रमिको पर बोझ डाला है बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और चमचे कार्पोरेट के हित में देश की अर्थव्यवस्था की नींव ही उखाड़े दे रही है। देश की उत्पादन क्षमता कम हो रही है , बेरोजगारी और महंगाई अपने चरम पर है । जनहित की नीतियाँ अमल में लाने के लिए आम जनता को श्रमिक संगठनो द्वारा आहूत की गयी राष्ट्रव्यापी हड़ताल/ कार्यबहिष्कार को सफल बनाना ही होगा ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि मौजूदा सरकारें सार्वजनिक क्षेत्रो की इकाइयों और अंडरटेकिंग पर विदेशी निवेश पर रोक लगाये । मौजूदा श्रम कानूनों को शिथिल बनाने की बजाये उनको कामगार हितेषी बनाये जाए ताकि ताकि कामगार के हित सुरक्षित रह सके । ठेका पद्दति , छटनी कटनी , वर्क जॉब बेसिस पर तत्काल रोक लगे । उन्होंने आगे कहा कि आंगनबाड़ी , आशा वर्कर्स , मिड डे स्काहित सभी स्कीम के तहत काम कर रहे कामगारो को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाये । श्रमिको की सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकारों का फर्ज है उनको किसी भी कीमत पर शिथिल न करके उसे और मजबूत बनाया जाये । सार्वजनिक वितरण प्रणाली सबके लिए सुलभ बनाकर महंगाई पर रोक लगाना सुनिश्चित करे । श्रम कानूनों में संसोधन बंद करे और सभी श्रमिक विरोधी संसोधन वापस ले । बेरोजगारी उन्मूलन के लिए राष्ट्रव्यापी रोजगारपरक नीतियों को निर्माण करे सरकार ।
डॉ. रमेश दीक्षित ने आगे कहा कि कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल को वापस लेना , इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है। विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली ,समान कार्य के लिए समान वेतन , ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों हेतु संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए तेलंगाना की तरह नियमित करना , बिजली सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रो का निजीकरण पूरी तरह बंद करना और प्राकृतिक संसाधनों को निजी घरानों को सौंपना बंद करना मुख्य हैं |
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