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गोंडा- तीन दिवसीय रामायण मेला व सूकरखेत महोत्सव 19 से--

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उत्तर भारत के प्रसिद्व और गोण्डा का गौरव, धार्मिक व ऐतिहासिक पौराणिकता को संजोए सूकरखेत गाथा का वेद पुराणों में अद्वितीय वर्णन है। पसका सूकरखेत के इस पावन सरयू संगम त्रिमुहानी तट पर पौष माह के कल्पवास को लेकर गृहस्थ कल्पवासी साधु संतों का डेरा है, जहां नित्य प्रति भोजन भजन व सत्संग प्रवचन के भक्तिभाव से सम्पूर्ण सूकरखेत लघु प्रयाग बना हुआ है। इस बारे में सनातन धर्म परिषद के डॉ0 स्वामी भगवदाचार्य ने बताया कि तुलसी जन्मभूमि न्यास एवं सनातन धर्म परिषद के तत्वावधान में तीन दिवसीय 36वां रामायण मेला व सूकरखेत महोत्सव का आयोजन 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 21 जनवरी तक चलेगा। इस अवसर पर यहाँ श्रीराम चरित मानस पाठ, सीताराम नाम संकीर्तन एवं भजन सत्संग का कार्यक्रम होगा। जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये हुए सन्त महात्मा, विद्वत जन, कवि साहित्यकार पहुँचकर रामायण व सूकरखेत महात्म्य के प्रसंगों पर प्रकाश डालेंगे। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को सायंकाल 4 बजे से सरयू संगम की महाआरती के साथ सूकरखेत महोत्सव शुभारंभ होकर 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा का मुख्य स्नान होगा।



          शहरी संस्कृति में भले ही आनंद, जश्न और छुट्टियां बिताने के अलग-अलग मायने हैं। लेकिन गाँव में आज भी जप तप पूजा प्रतिष्ठा के साथ साथ मेला में मनोरंजन का साधन होते हैं। और लोगों के दिलों को मिलाता है। एक मंच है जहां जनमानस जुटता है। यहां न ही कोई अमीर, न ही कोई गरीब होता है। आपसी संवाद होते हैं। उत्तर भारत में कई ऐसे मेले हैं। जो कई वर्षों से हो रहे हैं। जिनका अपना इतिहास है। इसी में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का पसका संगम मेला का अधिक महत्व है।
         गोण्डा जिला मुख्यालय से करीब 36 किमी दूरी पर स्थित पसका सूकरखेत में हर साल पूस के महीने में पसका संगम मेला आयोजित होता है। जो अगहन माह के कृष्ण पक्ष से शुरू होकर पूरे माह तक चलता है। इस बार 19 जनवरी को पसका संगम मेला शुरू होगा, 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा को मुख्य सरयू संगम स्नान है। जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। मेला शुरू होने से पहले यहां सरयू नदी के संगम तट त्रिमुहानी घाट पर काफी संख्या में नागा, साधु-संतों व गृहस्थों ने फूस की कुटिया डालकर कल्पवास, तपस्या में लीन है। अपना नाता परब्रह्म परमात्मा से जोड़ते हुए पूजा पाठ जप तप एवं भंडारे का आयोजन हो रहा है। यहां पर गोण्डा, कर्नलगंज, फैजाबाद, बहराइच, बाराबंकी जिले के श्रद्धालु पहुंचकर सरयू में डुबकी लगाकर अपने को धन्य मानते हैं। मेले में हर तरह की दुकाने, खान-पान सहित घरेलू समान लोग खरीददारी करते हैं। हैं। अलग-अलग स्थानों पर लोग भजन व कीर्तन कर रहे हैं। रामायण पाठ के साथ भंडारे का आयोजन भी शुरू है। जिससे सम्पूर्ण सूकरखेत भक्तिमय होकर जय सरयू मैया जय वाराह भगवान के भक्तिभाव से गुंजायमान है। यहाँ त्रिमुहानी सरयू संगम तट पर गुरु नर हरि आश्रम के सन्त तुलसीदास के तरफ से नित्य प्रति सन्तों का भंडारा हो रहा है।
       गोण्डा जिला में परसपुर क्षेत्र के पसका सूकरखेत स्थित लगने वाला त्रिमुहानी तट का संगम मेला 21 जनवरी को है। 21 जनवरी को दूरदराज से आए हुए श्रद्धालु पवित्र सरयू संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। भीषण ठंडक के बावजूद खुशगवार मौसम, हल्की धूप, बह रही मन्द मन्द, पवन पुरवईया में सरयू घाघरा के त्रिमुहानी तट पर स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ेगा। कल्पवासियों के हर हर गंगे, जय सरयू मैया, जय वाराह भगवान के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान सूकरखेत की छटा निराली है।  पौष पूर्णिमा स्नान और भगवान विष्णु का अवतार स्थल, वाराह क्षेत्र का पौराणिक महत्व है। श्रीराम चरित मानस के रचनाकार महाकवि तुलसी दास की जन्म स्थली तथा तुलसी के गुरु, नरहरि का आश्रम होने से सूकरखेत का महात्म्य शास्त्र पुराणों में वर्णित है। सूकरखेत महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जगहों से आए प्रदर्शनी स्टाल व थियेटर मेले का मुख्य आकर्षण रहता है। काला जादू, सर्कस, पपेट शो, वैरायटी शो, बेबी शो, झूला, ट्वाय ट्रेन, बच्चों का झूला, मौत कुंवा जैसे थियेटरों में पुरुष महिला समेत, युवाओं की काफी भीड़ उमड़ती है।
          सूकरखेत महोत्सव में मेलार्थियों के सुविधा सहायता और सुरक्षा दृष्टिगत पुलिस के जवान मुस्तैद रहते हैं। मेला के मार्गो पर चारो तरफ पुलिस बैरियर व पुलिस गश्त की मुस्तैदी रहती है। इस वर्ष के मेले का रूपायन और सूर्यदेव के दर्शन से मेलार्थी आनन्दित होंगे। बताया जाता है कि नया मेला, पुराना मेला, त्रिमुहानी तट पक्का घाट, वाराह भगवान समेत विभिन्न स्थानों पर प्रकाश की व्यवस्था स्नान घाट पर विशेष बांस बल्ली की बेरिकेटिंग तथा अराजक तत्वों चोर उचक्कों से होने वाली परेशानियों से निजात के लिये पुलिस पीएसी के जवान की गश्त की व्यवस्था की रहती है।

जे पी द्विवेदी
उप सपादंक
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