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कमीशन खोरी के चक्कर में मरीजों को लिखी जाती है बाहर की दवा तथा जांच

                                  HTN Live

             रवि कश्यप ब्यूरो चीफ फतेहपुर

फतेहपुर :उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने अपना एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश के समस्त जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपने सरकारी अस्पताल में बाहर की दवा तथा जांच लिखने वाले डॉक्टर के ऊपर कार्यवाही कर मरीज को जिला अस्पताल से ही हर सुविधा मुहैया कराने का काम करेंगे उनका यह बड़ा बयान भले ही अन्य जनपदों में लागू हो रहा हो किंतु जनपद फतेहपुर में जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा तथा जांच लिखने से कतई पीछे नहीं हटते वही जिला अस्पताल में अभी नवनियुक्त डॉक्टर कमरा नंबर 8 के डॉक्टर ने तो मरीजों को मानो  लूटने का ठेका ही ले रखा है ।

कमरा नंबर आठ के नवनियुक्त डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखने में हासिल कर रखी है महाराथ

जी हां विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमरा नंबर 8 के डॉक्टर के पास दलालों का लगता है जमावड़ा और एक बहुचर्चित डॉक्टर के दलाल की लिखी जाती है दवाएं हालांकि   संवाददाता ने इस दलाल की खबर प्रमुखता से उजागर की थी।

इमरजेंसी के सामने के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने 12 हजार रुपये सैलरी में रख रखे हैं लड़के, जो जिला अस्पताल से मरीजों को लेकर आते हैं मेडिकल स्टोर

 कहीं हद तक यह दलाल जिला अस्पताल में अपनी दलाली करने पर नाकामयाब भी साबित हो रहा था परंतु कमरा नंबर आठ के डॉक्टर ने उसे अपना आशीर्वाद देते हुए अपने कमरे में बिठाने का काम करते हैं और मरीज तथा उनके तीमारदारों को बाहर की दवा लिखकर उस दलाल की दलाली में अपनी अहम भूमिका निभा रहे वही जिला अस्पताल इमरजेंसी के ठीक सामने एक मेडिकल स्टोर संचालक जो अपने आप को सपा नेता भी कहते हैं,वही इस दलाल ने जिला अस्पताल से दलाली कराने का ठेका ले रखा है ।
मेडिकल स्टोर संचालक ने अपने यहां के स्टॉप की फोटो ना खिच ने की  पत्रकार को दी धमकी

  वही  इस दलाल की प्रमुखता से खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को मेडिकल स्टोर संचालक ने धमकी दे डाली और कहा कि बारह हजार रुपये सैलरी पर उसे रख रखा है वह जिला अस्पताल के अंदर कहीं पर भी बैठ सकता है तथा घूम सकता है यदि तुम्हारे द्वारा दोबारा मेडिकल स्टोर संचालक के स्टाफ की फोटो तथा वीडियो बनाई गई तो उसका अंजाम बुरा होगा ।
हालांकि जब संवाददाता ने मेडिकल स्टोर संचालक से यह बात कही की बारह हजार रुपये सैलरी मेडिकल स्टोर में काम करने का देते हो या जिला अस्पताल से दलाली करने का तो इतना सुनते ही मेडिकल स्टोर संचालक आग बबूला हो गया और पत्रकार हो धमकी देते हुए बोला कि यदि तुमने हमारे यहां के लड़के की फोटो खींची तो तुम्हारा बुरा अंजाम होगा
प्रत्येक मरीज को 500 से 600 के बीच की लिखी जाती है बाहर की दवा

 कमरा नंबर आठ के डॉक्टर ने प्रत्येक मरीज को कम से कम 500 से 600 की दवा बाहर की लिखते हैं और बीमारी ठीक करने के कारण मरीज को उनके द्वारा लिखी गई दवा बाहर से लेनी पड़ती है उसे क्या मालूम कि बाहर से लिखी हुई दवा में डॉक्टर साहब तथा उनके यहां बैठने वाले दलाल का अच्छा खासा कमीशन तैयार होता है वह तो बीमारी से ठीक होने के लिए मजबूरन डॉक्टर द्वारा लिखी गई बाहर की दवा लेने पर मजबूर हो जाता है क्या जनपद के जिला अस्पताल में उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के आदेश का पालन करना उचित नहीं समझते या फिर कमीशन खोरी के चक्कर में मरीज को लूटना ही उनकी प्राथमिकता है या फिर यह भी कहा जा सकता है कि मरता क्या न करता वाली कहावत यहां पूरी तरीके से चरितार्थ होती है क्या इसी तरीके उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का सपना साकार होगा या ऐसे भ्रष्ट डॉक्टर तथा उनके दलालों द्वारा उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के मंसूबों पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है!

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