उत्तर प्रदेश में जर्जर कानून व्यवस्था। सुरक्षा की मांग करने वाले पत्रकार की हत्या
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अजीत सिंह बागी ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश
लखनऊ 15 जून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने एक प्रेस बयान में कहा है कि प्रतापगढ़ जनपद में एक युवा टीवी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की जर्जर स्थिति को उजागर करती है। शराब माफियाओं से अपनी सुरक्षा की मांग करने वाला यह पत्रकार दूसरे ही दिन मौत के मुंह में डाल दिया गया। ताज्जुब है कि पुलिस इसे दुर्घटना बता रही थी किन्तु जब जन दबाव बना तो उसे हत्या का मुकदमा कायम करना पड़ा। यह घटना भाजपा की योगी सरकार के सुशासन की उस असलियत को बयान करती है जहां शराब माफिया शातिर अपराधी पुलिस से ज्यादा ताकतवर दिखाई दे रहे हैं। सुरक्षा की मांग करने वाले पत्रकार के पास पुलिस से पहले अपराधी पहुंच गये और उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। यही तस्वीर पूरे प्रदेश की है। आये दिन होने वाली ऐसी अनेक घटनायें हैं जो प्रकाश में ही नहीं आती।
ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में जो कानून का शासन नहीं बल्कि माफियाओं का शासन है जहां अपराधी पुलिस से अधिक ताकतवर बन गये हैं। ऐसी परिस्थिति में वे पत्रकार काबिलेतारीफ हैं जो माफिया पुलिस और नेताओं के गठजोड़ के खिलाफ लिखने और बोलने की हिम्मत कर रहे हैं।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) राज्य सचिव मण्डल ने कहा है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिस अधिकारियों एवं अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाय। पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव के परिवार को एक करोड़ रूपए का मुआवजा दिया जाय।

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