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क्यूँ सुरक्षित है कोरोना काल में यूपी की जेलें

                         HTN Live


               अजीत सिंह ब्यूरो चीफ

यह सोचकर भी डर लगता है कि आज कोविड ने जो कोहराम हमारी सोसाइटी गली मोहल्ले गांव   में  मचा रखा है  अगर उत्तर प्रदेश की जेलों में कोरोना उसी तरह  फैल गया होता तो क्या होता . यह दुखद  कल्पना बेहद भयावह दृश्य उपस्थित करती है अतः कल्पना भी आसान नहीं है . क्यूँकि जेल प्रतिबंधित क्षेत्र है और इस वजह से  आम तौर पर जेल के दरवाजों के अंदर क्या हो रहा है कम लोग जानते हैं . सब लोग नहीं जानते .

अगर कोरोना का संक्रमण उसी अनुपात में जेलों में  होता जैसा बाहर है तो मेडिकल कॉलेजों, 
जिला अस्पतालों में आम आदमी की तकलीफें और ज़्यादा बढ़ जातीं .  
बेड ऑक्सिजन और रेमडेसिविर  जैसी जीवन रक्षक दवाओं का संकट और गहरा जाता .
यू पी की 71  जेलों में आज 1,11,882 बन्दी निरुध्द हैं जो भारत के सभी जेलों में निरुध्द बन्दी जनसंख्या का लगभग एक चौथाई है और प्रायः सभी जेलें ओवर - क्राउडिंग  का शिकार हैं यानी उनमें क्षमता से दोगुने चौगुने बन्दी हैं . यानी सतर्कता न बरती जाए तो पूरी जेल को संक्रमित होने से कोई नहीं रोक सकता .

ज़ाहिर है  इस कोरोना काल में  जेलों में कोविड संक्रमण के बड़े पैमाने पर प्रसार को रोकने हेतु  यू पी की जेलों में सतर्कता और कुशल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती  और प्रथम  शर्त रही है .

*जेलों में कोरोना पॉज़िटिव दर 20 % भी होती तो इसका अर्थ होता एक साथ लगभग 22,000 एक्टिव केस वाले बन्दियों के इलाज के लिए  प्रदेश भर के जिला अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में  बेड की व्यवस्था . बन्दी चूंकि ज्यूडिशियल कस्टडी में होते हैं अतः  उनकी प्राणरक्षा हेतु आम जनता के सापेक्ष  बन्दियों को प्राथमिकता देकर इन अस्पतालों में  भर्ती करना पड़ता .  तब आम जन के इलाज़ के  लिए उपलब्ध चिकित्सा संसाधन बन्दियों पर खर्च करना पड़ता . ज़ाहिर है  स्वास्थ्य सेवाओं  पर संसाधनों की उपलब्धता की  दृष्टि से दबाव और  बढ़ता  जिससे जन सामान्य  को और  अधिक  कठिनाइयों का सामना करना पड़ता* .

लेकिन यहीं माननीय मुख्यमंत्री जी  की दूरदर्शी नीति  का लोहा मानना पड़ेगा कि स्थित को समझते हुए उन्होंने मार्च 2020 में हुए  लाकडाउन के साथ ही जेलों में कोरोना संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से   परिजनों से मुलाकात पर एक बार जो रोक लगाई तो उसका अनुपालन  आज भी जेलों में सख्ती से कराया जो आज भी जारी है .
बाहर की दुनिया से बन्दियों का सीधा सम्पर्क न होने से जेलों में संक्रमण सब्ज़ी दूध  खाद्य सामग्री आदि के साथ  लगभग नगण्य रूप में पहुंचा . जो पहुँचा  भी तो बन्दियों ने जेल में बड़े पैमाने पर निर्मित मास्क पहनकर सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करके  बढ़ने नहीं दिया .  अब तक लगभग 27 लाख मास्क बनाये बन्दियों ने . बन्दियों के सहयोग 
नियमित काढे, पौष्टिक भोजन  और योग चर्या  के द्वारा जेल प्रशासन ने कोरोना को डेडली नहीं होने दिया .


हालांकि  कोरोना की पहली लहर के कमजोर पड़ने पर पिछले कुछ महीनों में  बन्दियों के परिजनों की ओर से मुलाकात पर प्रतिबंध हटाने की भी मांग हुई .किन्तु व्यापक बन्दी स्वास्थ्य हित में ऐसा नहीं किया गया .
*कोरोना का यह निर्मम और क्रूर काल साक्षी है और हमेशा रहेगा कि मुख्यमंत्री जी की यह  दूरंदेशी काम आयी . आज जब जेलों के बाहर की दुनिया मे कोरोना ने  डर  भय का तांडव मचा रखा  है .यू पी की जेलों में कुल बन्दी जनसंख्या 1,11,882  के सापेक्ष आज दिनांक 30 04 2021 को मात्र 1722 एक्टिव केस रह गए है  जबकि 27 अप्रैल 2021 को कुल 1869 एक्टिव केस थे स्पष्ट है कि जेलों  में कोरोना केसेज अपेक्षाकृत न सिर्फ कम है बल्कि सतर्क निगरानी और बेहतरीन इलाज़ के चलते  संक्रमण भी धीरे धीरे कम हो रहा हैं* .

भारत के अन्य राज्यों की तुलना में  कोविड से बचाव हेतु
श्री आनन्द कुमार
पुलिस महानिदेशक /महानिरीक्षक के  कुशल नेतृत्व और जेल अधिकारियों के साथ मिलकर अचूक और निरन्तर प्रबंधन का ही नतीज़ा है  कि कोरोना काल के विगत लगभग एक साल की अवधि में अब तक मात्र 04 बन्दियों और 03 जेल स्टाफ की मृत्यु हुई हैं . तथापि इस जनहानि का  भी हमें बेहद दुख है .

कोरोना महामारी की विभीषिका के इस जारी दौर में  एकसाथ  भारी संख्या में  लोगों  के संक्रमित होने और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे दबाव को दृष्टिगत रखते हुए डी जी जेल  श्री आनन्द  कुमार ने  प्रदेश के सभी जेल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इस अभूतपूर्व संकट काल में हमें  अपने दायित्यों से आगे बढ़कर पीड़ित मानवता की सेवा करनी है .न सिर्फ जेल के बन्दियों के प्रति बल्कि निर्बल असहाय बन्दियों के कोविद्ग्रस्त परिजनों को भी यथाशक्ति कोविड से बचाना है .
उनके निर्देशों के अनुरूप  प्रयागराज ,सोनभद्र , फिरोजाबाद मथुरा जेल के जेल अधीक्षकों द्वारा जेल में निरुध्द बन्दियों के कोविड ग्रस्त  माता पिता और निकट परिजनों को उनके घर -गाँव में दवाएं ,  चिकिसकीय सहायता उपलब्ध करायी  गयी है .  इस व्यवस्था के तहत जेल वार्डर  बन्दियों के बीमार परिजनों के निवास पर जाकर 
जेल डॉक्टर  से  ऑडियो विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए  उनके लक्षणों के आधार  पर  कोरोना का पूरा पैकेज निशुल्क उपलब्ध करा रहे हैं  . यद्यपि अनेक जेल कर्मी भी संक्रमण झेल रहे हैं तथापि इस व्यवस्था का जेल अधिकारियों  ने स्वागत किया है और अधिक से अधिक जेलों  द्वारा इसे लागू किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं  .

 

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