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शिक्षा ही महिला सशक्तीकरण का माध्यम है : डॉ अलका सिंह

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काश फाउंडेशन मुंबई द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में  आयोजित कार्यक्रम  "कृतज्ञ : ग्रेटिटयूड  : वीमेन इन लीडरशिप " में  विशिष्ट अतिथि के रूप में  व्याख्यान देते हुए डॉ राम मनोहर लोहिया विधि  विश्वविद्यालय की शिक्षक  डॉ  अलका सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  साहित्य और सामाजिक रचनाओं और संरचनाओं में बालिकाओं और महिलाओं का गौरवशाली इतिहास , कला और कौशल ऊर्जा और उत्साह के सृजनात्मक रंगों को पढ़ने और समझने का अवसर प्रदान  करता है।  अंतर्विषयी अकादमिक कार्यों , अध्ययन  और शोधों में महिला सशक्तिकरण के विभिन्न सांस्कृतिक , सामाजिक , आर्थिक , राजनैतिक पक्ष ज्ञानकोशों की सीमाओं को विस्तृत करने का आह्वान है।  भारत समेत अन्य विकासशील और विकसित देशों में शिक्षा  ही महिला सशक्तीकरण की दिशा में  विशेष माध्यम है।  इक्कीसवीं शताब्दी के समाज में मानवीय मूल्यों की संरचना  और सही और गलत के पैमाने को समझने की आवश्यकता है। आवश्यकता है संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 8  मार्च 2021 के लिए तय की गयी थीम जनरेशन इक्वलिटी के परिप्रेक्ष्य  में सक्रिय होने की।  विषय और भी गंभीर हो जाता है जब हम समानता के भविष्य की कल्पना पोस्ट कोविड -19  परिप्रेक्ष्य में देखते हैं और आकलन की प्रक्रिया में यह पाते हैं की उनके नेतृत्व करने की क्षमता का आकलन जेंडर एम्पावरमेंट मेज़रमेंट के दृष्टिगत उनकी आर्थिक मज़बूती को समझे  है। भारतीय ज्ञान दर्शन एवं संस्कृति ने हमेशा ही महिलाओं के स्वास्थ्य , पोषण , संम्मान और सुरक्षा से सम्बंधित प्रकृति में निहित सृजनात्मक अवतार के रूप में देखा है। समय के साथ बदलते विधिक आयामों और सामाजिक संरचनाओं में एक जागरूक महिला निश्चय ही न केवल महिला सशक्तिकरण की मजबूत दिशा निर्धारित कर सकती है अपितु एक सशक्त समाज और देश की नीव भी है।

कार्यक्रम में  माननीय सांसद श्रीमती सुप्रिया सुले , आई पी एस श्रीमती मोक्षदा पाटिल ,  डॉ श्रीमती मंगला गोमारे ,  सेंट जेवियर्स कॉलेज मुंबई से    प्रो नंदिनी सरदेसाई   , और  टाटा  इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज की  डॉ नसरीन रुस्तमफ्रॉम उपस्थित रहे।  कार्यक्रम युटुब के माध्यम से काश फाउंडेशन मुंबई द्वारा लाइव संचालित किया गया।

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