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बदलते परिवेश में विकल्प बनकर उभर रही नेचुरोपैथी


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            ( उत्तर प्रदेश :- गोंडा )
               

      ( संवाददाता :- सुशील द्विवेदी )





♦️ मानव शरीर खुद रोगों से लडऩे में सक्षम होता है बस विधि का ज्ञान होना चाहिए। संसाधनों से समृद्ध प्रकृति से निकटता के जरिए आप सेहतमंद बने रह सकते हैं। तनाव होने पर डॉक्टर भी प्राकृतिक स्थल पर घूमने या बागवानी की सलाह देते हैं। 

♦️नेचुरोपैथी यानी प्राकृतिक चिकित्सा उपचार के लिए हमारा शरीर पंच तत्वों आकाश, जल,अग्नि,वायु और पृथ्वी  से मिलकर बना है।
                       


 ♦️ योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि अगर प्राकृतिक संतुलन के आधार पर जीवन जिया जाए तो बीमारी पास भी नहीं आएगी पांच तत्वों से बना शरीफ अगर दिमाग पर भी जाए तो उसे इन्हीं तत्वों के समवन्य से ठीक किया जाना ही प्राकृतिक चिकित्सा है।

♦️ उन्होंने कहा कि  भाग दौड़ व बदलते परिवेश में लोग प्राकृतिक उपचार पर भरोसा नहीं करते थे लेकिन अब वह समय पर वापस आया है जब लोग रोग ठीक करने के लिए पुरानी पद्धतियों पर विश्वास जताते हैं


♦️आयुर्वेद यूनानी अधिकारी डॉ अशोक कुमार ने कहा कि या कुदरती तरीके से स्वस्थ जिंदगी जीने की कला है मोटे तौर पर कहा जा सकता है। इस पद्धति के जरिए व्यक्ति का उपचार बिन दवाइयों के किया जा सकता है इसमें स्वास्थ्य और रोग की अपनी अलग सिद्धांत हैं और उपचार की अवधारणाएं भी अलग प्रकार की हैं।

 ♦️ मिट्टी से उपचार* योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी बताते हैं कि मिट्टी में मैग्नीशियम सोना तांबा जिंक जैसे तत्व पाए जाते हैं लक्षण के आधार पर दवा तैयार कर रोगी को दी जाती है।

♦️ अग्नि यानि ताप से इलाज*  अग्नि में एंटी एक्टिव वायरस पाया जाता है जो शरीर को अग्नि की सीधी रोशनी से शरीर को तपाया  जाता है। जिससे शरीर मे फैलने  वाले वायरस को नष्ट किया जा सकता है।
*वायु और जल से उपचार* प्राकृतिक औषधियों में वायु सबसे उत्तम उपचार माना जाता है प्राचीन काल से लेकर वर्तमान में भी संतों द्वारा इस पद्धति का को अपनाकर रोगों को दूर किया जाता है। वायु से शरीर को मुख्य प्राणायाम जानी प्राणवायु प्राप्त होती है। योगासन द्वारा शुद्ध वायु को शरीर के अंदर प्रवेश कराकर अंदर हानिकारक कीटाणुओं को बाहर निकालने में यह उपचार सबसे उत्तम और कारगर माना जाता है।

♦️ योग प्रशिक्षक आदर्श  गुप्ता  ने  बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पंच महाभूतत्वों (मिट्टी, पानी, धूप, हवा व आकाश) पर आधारित है। योग प्रशिक्षक से सलाह लेकर घर पर ही इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत जोड़ों का दर्द,ऑर्थराइटिस, स्पॉन्डलाइटिस,सियाटिका,पाइल्स, कब्ज,गैस,एसिडिटी,पेप्टिक अल्सर, फैटी लीवर,कोलाइटिस,माइग्रेन, मोटापा,डायबिटीज,हाई ब्लड प्रेशर, श्वांस रोग,दमा,ब्रॉनकाइटिस, सीओपीडी (क्रॉनिक,ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) व त्वचा संबंधी रोगों का सफलतम उपचार होता है।

प्राकृतिक जीवन शैली अपनाएं- स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें

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