80 वर्ष की लावारिस माता जी को उम्मीद ने अपनाया
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पवन पांडेय आपराध ब्यूरो प्रमुख उत्तर प्रदेश
उम्र के बड़े पड़ाव पर पहुँच कर अगर कोई सहारा देने वाला न मिले तो जीवन की उम्मीद खत्म से हो जाती है। आलमबाग लखनऊ की रहने वाली राम रानी 80वर्षीय है परंतु अब उनका पालन पोषण करने वाला कोई नही है। मायूसी और उदासी जीवन मे मेहमान बनकर बैठ गयी है और हर एक दिन आंखे आंसुओ की झरने की तरह बहती रहती है। उम्मीद संस्था को जब इनके बारे में पता चला तो तत्काल प्रभाव से उन्हें अपने परिवार के हिस्से की तरह जियामऊ रैन बसेरे लाया गया। उम्मीद संस्था धन्यवाद देती है एडवोकेट देवेश वाजपेई जी का एवं मोहम्मद अकील जी का जिनके द्वारा वृद्ध दादी राम रानी पता राम नगर आलमबाग लखनऊ को उम्मीद संस्था द्वारा संचालित नगर निगम लखनऊ के जियामऊ आश्रय गृह में लाया गया। दादी जी कम सुनती हैं परंतु अच्छी तरह से अपनी साफ सफाई का कार्य स्वयं कर लेती है। संस्था द्वारा अब लगभग 20 बेघर बुजुर्गों को अपनाया गया है जिनका कोई भी नही है था परंतु यह सब अब एक दूसरे का परिवार बन गए है। बहुत अच्छा लगता है इनको देख कर और इनके साथ समय बिताकर। आइये इनकी मद्दत और सहयोग हेतु आगे आये।
उम्र के बड़े पड़ाव पर पहुँच कर अगर कोई सहारा देने वाला न मिले तो जीवन की उम्मीद खत्म से हो जाती है। आलमबाग लखनऊ की रहने वाली राम रानी 80वर्षीय है परंतु अब उनका पालन पोषण करने वाला कोई नही है। मायूसी और उदासी जीवन मे मेहमान बनकर बैठ गयी है और हर एक दिन आंखे आंसुओ की झरने की तरह बहती रहती है। उम्मीद संस्था को जब इनके बारे में पता चला तो तत्काल प्रभाव से उन्हें अपने परिवार के हिस्से की तरह जियामऊ रैन बसेरे लाया गया। उम्मीद संस्था धन्यवाद देती है एडवोकेट देवेश वाजपेई जी का एवं मोहम्मद अकील जी का जिनके द्वारा वृद्ध दादी राम रानी पता राम नगर आलमबाग लखनऊ को उम्मीद संस्था द्वारा संचालित नगर निगम लखनऊ के जियामऊ आश्रय गृह में लाया गया। दादी जी कम सुनती हैं परंतु अच्छी तरह से अपनी साफ सफाई का कार्य स्वयं कर लेती है। संस्था द्वारा अब लगभग 20 बेघर बुजुर्गों को अपनाया गया है जिनका कोई भी नही है था परंतु यह सब अब एक दूसरे का परिवार बन गए है। बहुत अच्छा लगता है इनको देख कर और इनके साथ समय बिताकर। आइये इनकी मद्दत और सहयोग हेतु आगे आये।

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