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उत्तर प्रदेश के वामदलों ने सीबीआई जांच की सिफ़ारिश को नकारा

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   ‌‌                   ब्यूरो रिपोर्ट उत्तर प्रदेश

लखनऊ-  अक्तूबर- उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने योगी सरकार द्वारा हाथरस प्रकरण की जांच के लिये सीबीआई जांच की सिफ़ारिश को पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित करने और जांच को विलंबित करने की साजिश बताया है। यह पीड़ित परिवार द्वारा बार बार न्यायिक जांच की गुहार और उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर जांच कराने की कार्यवाही के विपरीत है। यह आरोपियों के पक्ष में खड़े लोगों और भाजपा की कपटपूर्ण चाल का परिणाम है।

वामपंथी दलों ने कहा कि तोते (सीबीआई) की कारगुजारी अभी हाल में सारा संसार बाबरी मस्जिद दहन केस में देख चुका है। विध्वंसक बार बार दुहराते रहे कि उन्होने ढांचा तोड़ा है और सीबीआई ने उनके बेदाग छूटने की व्यवस्था कर दी। इस जांच पर भला कौन विश्वास कर सकता है।

वामदलों ने कहा कि घटना के दिन 14 सितंबर से लेकर आज तक प्रदेश सरकार और प्रशासन पीड़ित परिवार का जघन्य उत्पीड़न करता रहा है और अब उनके ऊपर सीबीआई जांच थोप कर उत्पीड़न को जारी रखने और न्याय से वंचित करने का षडयंत्र है। रात के साढ़े नौ बजे एसआईटी टीम को पीढ़ितों के घर भेज देना भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है। राज्य सरकार को इससे बाज आना चाहिये।

वामदलों ने कहा कि जिलाधिकारी हाथरस और लीपापोती करने वाले अन्य अधिकारियों के यथावत पदों पर बने रहते कोई निष्पक्ष जांच संभाव नहीं। उन सभी को माकूल सजा दी जानी चाहिये।

वामदलों के नेताओं माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- माले राज्य सचिव सुधाकर यादव एवं फारबर्ड प्रदेश संयोजक अभिनव सिंह कुशवाहा ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और हाथरस की बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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