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भारत के साथ नेपाल को लिपू लेख ,कालापानी विवाद मे उलझाकर चीन ने नेपाल मे दो किलो मीटर अंदर घुस कर वनाई नौ सैन्य इमारते

HTN Live 

सीमा पिलर उखाड फेंके अब आगे बढाकर नये ताजा पिलर वनाये।

नेपाल मे विरोध के स्वर उठने पर चीन ने गायब किये गये पिलरो को उनके मूल स्थानो से कयी किलोमीटर आगे नये ताजा पिलर वनवा कर जांच दल से रिपोर्ट वदलवाई।
पीएम औली ने चुप्पी साधी।


                        Htnlive आदेश शर्मा

सिमकोट हुमला नेपाल ।
गत दिनो नेपाल के हुम्ला जिले मे चीन द्वारा अतिक्रमण करके नेपाली क्षेत्र मे नाम्खा गांव के लाम्चा क्षेत्र  मे चीनी सेना के अतिक्रमण से उपजे चीन कब्जा विवाद को ठंडा करने हेतु नेपाल सरकार ने पुन: एक जांच दल सीमा पर विवादित स्थल पर जांच हेतु भेजा जहां जांच दल को इस बार पूर्व सीमा स्थल से काफी पहले ही दो दिन पूर्व ताजा नये वनाये गये सीमा पिलर संख्या 10  जो कि चीन ने उखाड कर गायब कर दिया था नये स्थान पर वनाया हुआ मिल गया है।
और नेपाली जांच दल वहीं ताजा वनाये गये सीमा पिलर के पास खडे होकर फोटो ग्राफ वनवा कर पिलर के दूसरी तरफ के चीनी अतिक्रमण क्षेत्र को चीन का होना बताते हुये वापस लौट आया है और काठमांडू को रिपोर्ट भी भेज दी है 
वही नाम्खा गांव पालिका के लोगो को अब चीन के कब्जे  का भय सताने लगा है नाम्खा गाऊं पालिका के अध्यक्ष विष्णु बहादुर लामा के अनुसार चीनी सेना उनके गांऊं वासियों को अब आगे उनके ही छेत्र मे जाने से रोक रही है 
सूत्रो के अनुसार नेपाल सरकार के दवाव मे जांच दल ने अपनी नयी रिपोर्ट मे कहा है कि जांच उपरांत  यह निष्कर्ष निकाला गया है कि लालंगजोंग में निर्मित सभी इमारतें चीनी क्षेत्र में हैं। चीन की ओर से नेपाली भूभाग  पर भवन के निर्माण की निगरानी के लिए एक नेपाली टीम विवीदित साइट पर गई थी।जिसने सीमा पिलर देखने के बाद रिपोर्ट दी है ।

जब कि तीन दिन पहले जांच को गयी नेपाली टीम ने निष्कर्ष निकाला था कि नये वनाये गये चीनी इमारते नेपाल की जमीन मे वनाये गये हैं और पुराने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिलरो को चीन ने उनके वास्तविक स्थान से उखाडकर गायब कर दिया है जिनमे पिलर संख्या 10,11,12 मुख्य रूप से गायब हैं 
पर अब नये सीमा पिलर संख्या 10  के नये स्थान पर नये ताजा पिलर के  उद्भव के बाद अतिक्रमण किया गया छेत्र चीन का होने का दावा नेपाल की सत्तारूढ औली सरकार द्वारा मान लिया गया है । 
दोनों देशों के अधिकारियों ने तथाकथित रूप से नाम्खा गांव के लापचा क्षेत्र में भवन के निर्माण स्थल पर दोनों देशों के नक्शे को देख कर सीमा पिलर के आधार पर नयी सीमा को स्वीकार कर लिया है

पुन: नेपाल सरकार द्वारा जांच को भेजी गयी नेपाली टीम के मुख्य जिला अधिकारी, चिरंजीवी गिरि ने अब ताजा रिपोर्ट मे  कहा है  कि जिस क्षेत्र में चीन द्वारा इमारत का निर्माण किया गया है वह चीनी क्षेत्र में थी  जब नेपाली और चीनी अधिकारी दोनों देशों के नक्शों पर लालंगजोंग में देखते थे। यह कहते हुए कि वह स्थान अब नेपाली क्षेत्र में नहीं होगा जब सीधे नक्शे को देखते हुए, उन्होंने तथ्यों को समझने के बाद ही विवाद को बाहर लाने का आग्रह किया।

गिरि ने स्पष्ट किया कि सीमा की निगरानी की महत्वपूर्ण उपलब्धि सीमा स्तंभ संख्या 11 की खोज है, जिसे नेपाली पक्ष द्वारा गायब बताया गया है
जबकि हुम्ला जिले कीनेपाल व चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर वने पिलर को साफ देखा जा सकता है कि पिलर ताजा वना है 
इससे यह बात स्पष्ट रुप से सच साबित होती है कि चीन ने नेपाल के हुम्ला जिले मे नेपाल के अंदर साढे तीन किलो मीटर घुस कर नेपाल सीमा पर लगे पुराने सीमा पिलर उखाड कर गायब कर दिये और आगे बढ कर कब्जा करके नेपाली जमीन पर नौ सैन्य इमारते खडी करली है वही चीन मोह मे अंधे केपी शर्मा औली अब कब्जाये भूभाग को नेपाल का नही चीन का ही है ऐसा बताकर आम नेपालियो को गुमराह करने मे लगे हैं
बताते चले कि पिछले दिनो नेपाल के ही एक पत्रकार ने यह खबर देकर सनसनी फैला दी थी कि चीन नेपाल को भारत के साथ लिपूलेख कालापानी सीमा विवाद मे उलझा कर  नेपाल के कर्णाली प्रदेश के हुमला जिले में दो किमी अंदर  घुसकर स्थायी सैन्य इमारतो का निर्माणकरचुका है 
वही चीन ने इस छेत्र की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगे पुराने पिलर संख्या 10 ,11 व 12  के साथ और भी पिलरो को उखाड कर गायब कर दिया है 
यही नही नेपाल सीमा मे घुस कर अबैध निर्माण के आरोपों में घिरी चीनी सेना द्वारा गत मंगलवार को अतिक्रमण की जांच करने पहुंची नेपाली टीम को ही धमका कर विवादित स्थान से भगा दिया था  तमाम कोशिश के बाद भी अतिक्रमित क्षेत्र में जाने नहीं दिया। वहां से लौटी टीम ने नेपाल सरकार को जो रिपोर्ट भेजी थी , जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि की गई थी

जांच टीम द्वारा दी गयी रिपोर्टो मे स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विवादित वनाये जारहे  सीमा छेत्र  पर लगाए गए पिलर नंबर 10, 11 और 12 भी अपने पूर्व स्थान पर  नहीं मिले, जिसे चीनी सेना उखाड  कर बॉर्डर में बदलाव की कोशिश की है। 
टीम के साथ मौजूद नाम्खा गांवपालिका के अध्यक्ष विष्णु बहादुर लामा ने बताया कि चीनी सेना ने सीमांकन करने वाले पीलर संख्या 10, 11व 12 को ध्वस्त कर गायब करने के बाद नेपाल के  नाम्खा गांवपालिका की जमीन पर कब्जा कर लिया है और चीनी सैन्य ढांचा व रेजिडेसिंयल विल्डिगें वना ली है ।
मंगलवार को जब हम प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर जाने लगे तो हमें चीनी सेना ने रोक दिया। प्रतिरोध देख हमें लौटना पड़ा। हमें सीमा पर लगाए गए पिलर भी पूर्व स्थानो पर नहीं दिखे।
जब यह रिपोर्ट नेपाल मे बायरल हुयी तब नेपाल मे औली सरकार व चीन की मिली भगत से नेपाल की भूमि पर चीनी कब्जे का विरोध नेपालियो द्वारा स्थान स्थान पर आरम्भ कर दिया गया जिससे बैक फुट पर आयी नेपाल की औली सरकार ने चीन के साथ मिलकर आम नेपालियो के साथ धोखा करते हुये इस नये चीन ,नेपाल सीमा विवाद पर पर्दो डालने के क्रम मे चीन ने कब्जाये गये छेत्र से और डेढ किलो मीटर आगे नेपाली छेत्र मे तत्काल नया पिलर वनवा दिया ।
वही औली सरकार ने पिलर वनने के बाद ड्रामा रच कर नेपाली जनता को गुमराह करने हेतु 
हुमला के प्रमुख जिलाधिकारी चिरंजीवी गिरि को पुन: जांच करने और रिपोर्ट देने को कहा 
दूसरी बार की जांच मे स्वयं हुम्ला के जिलाधिकारी के साथ गयी चीन समर्थित जांच टीम को नया वना पिलर संख्या 11 पुरानी सीमा और विवादित अतिक्रमण वाले स्थान से लगभग डेढ किलो मीटर पहले ही दिखाई दे गया और इसी के साथ पहले की अतिक्रमण वाली स्वयं की ही रिपोर्ट को सरकार के दवाव मे झुंठलाते हुयेजिलाधिकारी हुमला चिरंजीवी गिरि ने बताया कि नेपाली पिलर संख्या 11 मिल गया है पर पुराना नही नया है 
पिलर के आगे चीनी सेना ने जाने नही दिया ।
जिलाधिकारी ने सरकार के दवाव मे नयी रिपोर्ट मे यह लिख कर कि चीन ने कोई कब्जा नही किया है और चीन ने जो विल्डिंग्स वनाई है वह चीनी छेत्र है नेपाली भूभाग नहीं है 
और इसी के साथ जांच टीम ने नये वने सीमा पिलर के पास खडे होकर वाकायदा फोटो भी खिचाये और रिपोर्ट मे लगाते हुये नेपाल की औली सरकार न चीन की नेपाली भूभाग पर अतिक्रमण पर मोटा पर्दा डाल दिया है।
  रिपोर्ट तैयार कर काठमांडू भेज दी गयी है। 
जांच टीम में नाम्खा गांवपालिका के अध्यक्ष विष्णु बहादुर लामा, हुमला के प्रमुख जिलाधिकारी चिरंजीवी गिरि, नेपाली सेना के अधिकारी, नेपाल पुलिस, नेपाली सशस्त्र बल, नेपाल खुफिया विभाग और गांव पालिका के अध्यक्ष शामिल रहे।
भारत-नेपाल संबंधों के जानकारो की माने तो चीन भारतीय सीमा तक पहुंचने के लिए नेपाल को माध्यम बना रहा है। इसके लिए उसने विस्तृत योजना तैयार की है। नेपाल में संचालित विकास परियोजनाओं के माध्यम से उसने पहला चरण बखूबी पूरा कर लिया है। सीमावर्ती जिलों में स्थापित जल विद्युत परियोजनाओं, एयरपोर्ट निर्माण, विद्यालयों और चीनी भाषा मंदारिन के नेपाल मे प्रचार प्रसार के केंदो के रूप  में उसकी पूरी भागीदारी है। चीन अब दूसरे चरण पर तेजी से काम कर रहा है। इसके लिए चीन नेपाल को भारत के साथ लिपूलेख कालापानी के काल्पनिक सीमा विवाद में उलझाकर स्वयं नेपाल के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण  छेत्रो  पर कब्जा करके पक्के निर्माण कर व सीमा पर पिलरो को उनके वास्तविक स्थान से उखाड कर गायब करके नेपाल मे काफी अंदर घुस कर नये सीमा पिलर वना कर अपनी सीमा का चतुराई से विस्तार करना प्रारम्भ कर चुका है । 
सही देखा जाये तो नेपाल के रास्ते चीन की पहुंच उत्तर प्रदेश और बिहार बॉर्डर तक हो चुकी है। 
अब वह सामरिक रूप से अहम उत्तराखंड सीमा तक पहुंच बनाने में जुटा है। उसे लगता है कि नेपाल मे ग्रेटर नेपाल की फर्जी स्टोरी गढ कर नेपालियो को उकसा कर चीन नेपालियो के आड मे  महाकाली कॉरिडोर के रास्ते उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले तक आसानी से पहुंचने की कोशिश कर रहाहै ।

चीन ने सामरिक रूप से अहम गोरखा जिले के भागडेर खोला में घुसपैठ कर पक्का निर्माण कर लिया है। हुमला जिले में करनाली नदी, सिंजेन नदी के बीच भी वह पहुंच गया है। यहां उसकी कोशिश नदी का रुख बदल नेपाल के साथ ही भारत को भी प्रभावित करने की है। सुरक्षा जानकार इसे चीन के नवीन अस्त्र वाटर बम के रूप में देख रहे हैं।

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