गौशाला में भूख से मर रहे गौबंशीय, कौन लेगा जिम्मेदारी? क्या राजनीति में गाय एक एजेंडे की तरह ही इस्तेमाल होती रहेगी
HTN Live
रिपोर्ट हिन्दू अमन मिश्रा
भूख से तड़प तड़प कर मर रहे गौवंशीय
जलालाबाद के खंडहर रोड़ स्थित गौशाला में गौवंशीय की भूख से तड़प तड़प कर मौत
नाकामी छुपाने के लिए पोस्टमार्टम की बजाय आनन फानन में नगर पालिका की जेसीबी से दफनाया
शाहजहाँपुर।भारत में गाय कहीं आस्था का प्रतीक है, तो कहीं पहचान।राजनीति में गाय एक एजेंडे की तरह भी इस्तेमाल होती आई है।गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात हो या गौरक्षा , गाय के नाम पर राजनीति खूब होती है।
यूपी में भाजपा सरकार बनते ही योगी जी ने गौ रक्षा के लिए गोकशी पर कड़ा रुख किया. सरकार ने सभी अवैध बूचड़खानों को बंद करवा दिया. गोकशी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश भी दिये। इसके बाद गोकशी तो रुक गई लेकिन यहां अब गाय खुद ही भूख से तड़प तड़प कर मर रही हैं।
किसानों की फसलों को बचाने के लिए योगी सरकार ने आदेश जारी किया कि आनन फानन में आवारा घूम रहे गौवंशीय को पकड़ पकड़ कर स्थाई या अस्थाई गौशाला बनाकर उसमे बन्द किया जाय।आदेश आते ही सरकारी कर्मचारी सारे काम छोड़कर सुबह शाम गौवंशीय को पकड़ने में लग गये।कुछ दिन तक हाय तौबा करने के बाद जगह जगह अस्थाई और अस्थाई गौशालाएं बनाई गई।गौवंशीय भी पकड़ पकड़ कर इसमे भर दिए गए।लेकिन सरकार ने इनके चारे की कोई व्यवस्था नही की।और न ही इनके चारे के लिए कोई सरकारी मद बनाया।
सरकारी कर्मचारियों ने अपना अपना गुडवर्क करके मोबाइल से फ़ोटो खींचे और उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दिए ।
और इसी ले साथ गौसेवा अध्याय की समाप्ति हो गई।
जलालाबाद में खंडहर रोड पर भूख से तड़प तड़प कर एक गौवंशीय की मौत हो गई।प्रशासन ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए भूख से मरे गौवंशीय का पोस्टमार्टम कराने की बजाय आनन फानन में नगर पालिका की जेसीबी भेजकर उस गौवंशीय को दफना दिया।
यदि उसका पोस्टमार्टम होता तो गौशाला के जिम्मेदारों को जबाब देना मुश्किल हो जाता।
#चारे की व्यवस्था करना प्रशासन का काम था
अस्थाई और अस्थाई गौशालाओं में चारे की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों तथा जिस रकवे में गौशाला बनाई गई उसके ग्राम प्रधान की थी।
ऐसा नही है कि इन गायों के लिए चारा की व्यवस्था हो नही सकती है ग्राम समाज की सैकड़ो बीघा जमीनों पर माफियाओं ने अवैध कब्जा करके गेंहू बो रखा है प्रशासन यदि चाहता तो इस अवैध कब्जे बाले गेंहूँ को कटवा कर गौशालाओं को दे सकता था लेकिन प्रशासन खुद माफियाओं से हाँथ मिलाए बैठा होता है और प्रधान अपने वोट बैंक के कारण चरागाह के अवैध कब्जे से फसल नही कटवा सकता।
रिपोर्ट हिन्दू अमन मिश्रा
भूख से तड़प तड़प कर मर रहे गौवंशीय
जलालाबाद के खंडहर रोड़ स्थित गौशाला में गौवंशीय की भूख से तड़प तड़प कर मौत
नाकामी छुपाने के लिए पोस्टमार्टम की बजाय आनन फानन में नगर पालिका की जेसीबी से दफनाया
शाहजहाँपुर।भारत में गाय कहीं आस्था का प्रतीक है, तो कहीं पहचान।राजनीति में गाय एक एजेंडे की तरह भी इस्तेमाल होती आई है।गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात हो या गौरक्षा , गाय के नाम पर राजनीति खूब होती है।
यूपी में भाजपा सरकार बनते ही योगी जी ने गौ रक्षा के लिए गोकशी पर कड़ा रुख किया. सरकार ने सभी अवैध बूचड़खानों को बंद करवा दिया. गोकशी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश भी दिये। इसके बाद गोकशी तो रुक गई लेकिन यहां अब गाय खुद ही भूख से तड़प तड़प कर मर रही हैं।
किसानों की फसलों को बचाने के लिए योगी सरकार ने आदेश जारी किया कि आनन फानन में आवारा घूम रहे गौवंशीय को पकड़ पकड़ कर स्थाई या अस्थाई गौशाला बनाकर उसमे बन्द किया जाय।आदेश आते ही सरकारी कर्मचारी सारे काम छोड़कर सुबह शाम गौवंशीय को पकड़ने में लग गये।कुछ दिन तक हाय तौबा करने के बाद जगह जगह अस्थाई और अस्थाई गौशालाएं बनाई गई।गौवंशीय भी पकड़ पकड़ कर इसमे भर दिए गए।लेकिन सरकार ने इनके चारे की कोई व्यवस्था नही की।और न ही इनके चारे के लिए कोई सरकारी मद बनाया।
सरकारी कर्मचारियों ने अपना अपना गुडवर्क करके मोबाइल से फ़ोटो खींचे और उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दिए ।
और इसी ले साथ गौसेवा अध्याय की समाप्ति हो गई।
जलालाबाद में खंडहर रोड पर भूख से तड़प तड़प कर एक गौवंशीय की मौत हो गई।प्रशासन ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए भूख से मरे गौवंशीय का पोस्टमार्टम कराने की बजाय आनन फानन में नगर पालिका की जेसीबी भेजकर उस गौवंशीय को दफना दिया।
यदि उसका पोस्टमार्टम होता तो गौशाला के जिम्मेदारों को जबाब देना मुश्किल हो जाता।
#चारे की व्यवस्था करना प्रशासन का काम था
अस्थाई और अस्थाई गौशालाओं में चारे की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों तथा जिस रकवे में गौशाला बनाई गई उसके ग्राम प्रधान की थी।
ऐसा नही है कि इन गायों के लिए चारा की व्यवस्था हो नही सकती है ग्राम समाज की सैकड़ो बीघा जमीनों पर माफियाओं ने अवैध कब्जा करके गेंहू बो रखा है प्रशासन यदि चाहता तो इस अवैध कब्जे बाले गेंहूँ को कटवा कर गौशालाओं को दे सकता था लेकिन प्रशासन खुद माफियाओं से हाँथ मिलाए बैठा होता है और प्रधान अपने वोट बैंक के कारण चरागाह के अवैध कब्जे से फसल नही कटवा सकता।


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