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-हास्य कवियों ने दर्शकों को सीट से हिलने का भी मौका नहीं दिया, देर रात तक चला आयोजन

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जिस घर में मां-बाप का सम्मान नहीं...
-रमणीक सभा की ओर से हुसैनगंज क्षेत्र में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और विशिष्ठ सम्मान समारोह 

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता
'जिस घर में माता-पिता का सम्मान नहीं, उस घर में रहने वाले इंसान नहीं' और 'माना हमारा देश ओलंपिक में फेल है पर उल्लू सीधा करना हमारे बाएं हाथ का खेल है' जैसी कविताएं जब हास्य कवि सरसिज कुमार त्रिवेदी 'अतुल' और मुकुल महान ने पढ़ीं तो अखिल भारतीय कवि सम्मेल में दर्शक वाहवाही करते नहीं थके। मौका था रमणीक सभा की ओर से शनिवार को हुसैनगंज क्षेत्र में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और विशिष्ठ सम्मान समारोह का। 
कवियों ने यहां जब अपनी कविताओं के माध्यम से राजनीति की छौंक लगाई तो तालियों की गड़गड़ाहट से दर्शक दीर्घा गूंज उठी। हास्य कवियों ने दर्शकों को सीट से हिलने का भी मौका नहीं दिया। वाह-वाह और वन्स मोर की आवाज नही थम रही थीं। पंकज प्रसून ने सुनाया कि 'मैंने पूछा बाबा कला धन कब आएगा तो बाबा बोले बेटा कपालभाती करते हो। मैंने बोला नहीं, बाबा बोले किया करो ऐसे ख्याल नहीं आएंगे।' कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राघवेन्द्र कुमार रहे। इतिहासकार योगेश प्रवीण, लेखक संकल्प शर्मा, नवीन चंद्र द्विवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कवि पंकज प्रसून, अभय सिंह निर्भीक, विपिन मलिहाबादी, अमित अनपढ़, पूनम हिम्मत समेत कई कवियों ने यहां अपनी कविताएं सुनाकर तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में पार्षद राजेन्द्र सिंह, अमित चौधरी, हर्षित दीक्षित, पूर्व पार्षद अनूप त्रिवेदी, राजनारायण जायसवाल, जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

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