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तस्करी कर लेजारहे मानव तस्कर को एसएसबी ने धर दबोचा दो लडकियां वरामद

HTN Live


आदेश शर्मा
जनपद  लखीमपुर खीरी तिकुनियां कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए  70 वीं वाहनी एस एस बी की सी कम्पनी बरसोला सतर्क बरसोला एस एस बी के द्वारा पीलर संख्या 704 खकरौला घाट के समीप है जहा पर वरसोला कंपनी के   इंस्पेक्टर भरत कुमार सिंह,मुख्य आरक्षी सुखविंदर सिंह,मुख्य आरक्षी फतेह सिंह,कांस्टेबल विपुल,कांस्टेबल बाबू लाल,गस्त के दौरान मानव तस्करी में दो लड़कियों व एक लड़के को कब्जे में लेकर नेपाल एन.जी.ओ व नेपाल प्रहरी के सुपुर्द किया गया
जानकारी के अनुसार आज दोपहर नेपाल से एक मानव तस्कर युवक दो नेपाली युवतियो को नेपाल से बहलाफुसला कर नेपाल के चेक पोष्ट व बार्डर पर तैनात नेपाली संस्था माइती नेपाल के चेकपोष्ट को झांसा देकर भारत के खकरौला स्थित पिलर संख्या 704 को  पार कर भारत मे घुस गया पर आगे चोर रास्ते पर तिकोनियां वरसोला स्थित एसएसबी की गश्ती टीम की तेज आंखो से नहीं बच सका
गश्ती टीम के इंस्पेक्टर एसएसबी भरत सिंह व उनके हम राही जवानो ने तीनो को रोक कर जब उनसे उनकी नागरिकता पता व आपसी संबंधो तथा तिकोनियां आने का कारण पूंछा तब मामला संदेहास्पद लगने पर एसएसबी वरसोला ने सीजर वना कर भारत नेपाल संधि के आधार पर तीनो संदिगधो को नेपाल के पुलिस अधिकारियो  के समक्छ
नेपाल के मानव तस्करी रोकने मे लगे एनजीओ माइती नेपाल को अग्रिम कार्यवाही हेतु सौंप दिया है जहां से वरामद दोनो लडकियो को उनके परिजनो के पास भेजने के साथ तस्करी मे लिप्त युवक को नेपाली कानून के तहत कार्यवाही कर जेल भेजा जायेगा
बताते चले कि पडोसी राष्ट्र नेपाल से प्रति वर्ष हजारो की संख्या मे मानव तस्कर  अपने नेपाल के ऊंचे पहाडो दुर्गम जंगलो मे स्थित नेटवर्क के माध्यम से नेपाल की कम उम्र लडकियो के प्रेमजाल मे फंसाकर या ऊंचे सुनहरे ख्वाव या भारत मे अच्छी नौकरी का प्रलोभन देकर अपने सुनहरे  जाल मे फंसा कर वहलाफुसला कर भारत ले आते है
जहां बार्डर पर बैठे इन तस्करो के ऐजेंट दोनो देशो की सीमाओ पर बैठे जांच ऐजेन्सियो की आंखो मे धूल झोंक कर इन्हे सीमा पार करा देते है फिर भारत मे मौजूद मानव तस्करो के एजेन्ट इन्हे धीरे धीरे प्राइवेट गाडियो से या बसो द्वारा लडकियो को दिल्ली वनारस मुम्बई चंडीगढ जैसे शहरो मे भेज कर इन्हे चकलेखानो जैसे नर्क मे धकेल कर कुछ लाख रुपये कमा लेते है पर इन भोली भाली नेपाली बालिकाओ को सिर्फ मौत के बाद ही मुक्ति मिल पाती है

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