पुलिसिया इकबाल को शातिरों का ठेंगा घर के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो लेकर फरार हुए शातिरों को राजधानी लखनऊ की पीजीआई पुलिस पकड़ने में अब तक नाकाम
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*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही सूबे को अपराध और भय मुक्त बनाने का दावा कर रही है परन्तु लगातार घटनाओं को अंजाम दे हौसला बुलन्द हो चुके अपराधियों की वारदातें हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं। आलम यह है कि चाहे सूनसान इलाका हो या चहल पहल और भीड़ भाड़ वाला इलाका शातिर बड़ी ही आसानी से घटनाओं को अंजाम दे रफूचक्कर हो जा रहे हैं और हामरी मित्र पुलिस अपराधियों की धर पकड़ के लिये विशेष अभियान चलाने का दम्भ भर रही है। मित्र पुलिस द्वारा चलाये जा रहे अपराधियों के खिलाफ अभियान से शातिर और खूंखार कितने डरे दुबके हैं जरा आज उसकी एक बानगी और देख लीजिये। आम तौर पर मुखबिर खास की सूचना पर शातिर अपराधियों को पकड़ने का दावा करने वाली पुलिस कितनी मुस्तैद है जो एक पॉश इलाके में चोरी वारदात को रोकने में नाकाम रही तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा लीजिये की दूर-दराज वाले इलाकों के हाल क्या होगा। यही नहीं मुखबिर खास की सूचना पर योजना बनाते अपराधियों को धर दबोचने का बखान करने वाली पुलिस का इस चोरी की वारदात के 48 घण्टे बाद भी हाथ खाली ही हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के अपराध और भय मुक्त प्रदेश बनाने के दावे को हमारी मित्र पुलिस कितनी ज़िम्मेदारी से साकार कर रही है। जब प्रदेश की राजधानी का यह हाल है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों के आतंक का हाल क्या होगा?
राजधानी के पॉश इलाकों में इन दिनों हाई स्टेटस् वाले चोर धूम मचा रहे हैं जिनपर शिकंजा कसने में योगी पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। ये कोई मामूली चोर नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी गाड़ियों पर अपना हाथ साफ करने वाले शातिर हैं। जो मौका देखकर बड़ा हाथ साफ कर जाते हैं और हमारी पुलिस बस मामले की तफ्तीश में जुट जाती है। पुलिसिया तफ्तीश का आलम यह है कि मित्र पुलिस तफ्तीश पूरी भी नहीं कर पाती है कि शातिर उन्हें दूसरे नये वारदात का तोहफा थमा देते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही अपराध और अपराधियों पर लगाम कसने की दम्भ भर रही है लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट ही है। इन दिनों बेखौफ हो चुके अपराधियों का आतंक बढता ही जा रहा है। जिस पर लगाम लगा पाने में उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस नाकाम साबित हो रही है। वाहवाही लूटने व अपनी पीठ थपथपाने के लिये छोटी-मोटी धर पकड़ पर सराहनीय कार्यों वाली बड़ी-बड़ी का प्रेसनोट जारी करने वाली लखनऊ पुलिस एक बार फिर चोरों व अपराधियों के आगे बेबस नज़र आ रही है। राजधानी में चोरों का आतंक सिर चढ़ कर बोल रहा है। आये दिन चोर पुलिस को चुनौती देते हुए चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला पीजीआई थाना क्षेत्र अन्तर्गत ई-382 रक्षा खण्ड एल्डिको-2 रायबरेली रोड निवासी शैलेन्द्र कुमार सिंह एडवोकेट पुत्र स्व0 राम स्नेही का है। शैलेन्द्र ने अपने घर के बाहर बीती 13 जनवरी की शाम अपनी सफेद रंग की स्कॉर्पियो नम्बर यू0पी0 32 जे0ए0 4729 पार्क की थी। 14 जनवरी की भोर करीब 4:30 बजे जब उन्होंने अपने घर के बाहर देखा तो उनकी स्कॉर्पियो हौसलाबुलंद शातिर चंपत कर चुके थे। पीड़ित शैलेन्द्र ने थाना पीजीआई में लिखित शिकायत दर्ज करायी। पीड़ित लगातार थाने के चक्कर काट रहा है लेकिन स्थानीय पुलिस के हाथ अपराधियों को दबोचने व कर बरामद करने में 48 घण्टे से भी ज़्यादा समय बीतने के बाद भी अब तक खाली ही हैं।
सवाल यह उठता है कि प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का बीड़ा उठाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार जो रही वारदातों को रोकने व इन हौसलाबुलंद अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में नाकाम साबित क्यो हो रही है। क्या इन ताबड़तोड़ वारदातों के बलबूते पर ही योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश को बनायेगी भय मुक्त और अपराध मुक्त। अब देखना यह है कि घर के बाहर खड़े वाहन को चोरी कर पुलिसिया इकबाल को ठेंगा दिखाने वाले शातिरों को हमारी मित्र पुलिस पकड़ने में और वाहन बरामद करने में कामयाब होती है या फिर सिर्फ स्क्रिप्टेड सराहनीय कार्यों के बल बूते पर अपनी पीठ थपठापने में तल्लीन रहेगी।
*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही सूबे को अपराध और भय मुक्त बनाने का दावा कर रही है परन्तु लगातार घटनाओं को अंजाम दे हौसला बुलन्द हो चुके अपराधियों की वारदातें हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं। आलम यह है कि चाहे सूनसान इलाका हो या चहल पहल और भीड़ भाड़ वाला इलाका शातिर बड़ी ही आसानी से घटनाओं को अंजाम दे रफूचक्कर हो जा रहे हैं और हामरी मित्र पुलिस अपराधियों की धर पकड़ के लिये विशेष अभियान चलाने का दम्भ भर रही है। मित्र पुलिस द्वारा चलाये जा रहे अपराधियों के खिलाफ अभियान से शातिर और खूंखार कितने डरे दुबके हैं जरा आज उसकी एक बानगी और देख लीजिये। आम तौर पर मुखबिर खास की सूचना पर शातिर अपराधियों को पकड़ने का दावा करने वाली पुलिस कितनी मुस्तैद है जो एक पॉश इलाके में चोरी वारदात को रोकने में नाकाम रही तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा लीजिये की दूर-दराज वाले इलाकों के हाल क्या होगा। यही नहीं मुखबिर खास की सूचना पर योजना बनाते अपराधियों को धर दबोचने का बखान करने वाली पुलिस का इस चोरी की वारदात के 48 घण्टे बाद भी हाथ खाली ही हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के अपराध और भय मुक्त प्रदेश बनाने के दावे को हमारी मित्र पुलिस कितनी ज़िम्मेदारी से साकार कर रही है। जब प्रदेश की राजधानी का यह हाल है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों के आतंक का हाल क्या होगा?
राजधानी के पॉश इलाकों में इन दिनों हाई स्टेटस् वाले चोर धूम मचा रहे हैं जिनपर शिकंजा कसने में योगी पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। ये कोई मामूली चोर नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी गाड़ियों पर अपना हाथ साफ करने वाले शातिर हैं। जो मौका देखकर बड़ा हाथ साफ कर जाते हैं और हमारी पुलिस बस मामले की तफ्तीश में जुट जाती है। पुलिसिया तफ्तीश का आलम यह है कि मित्र पुलिस तफ्तीश पूरी भी नहीं कर पाती है कि शातिर उन्हें दूसरे नये वारदात का तोहफा थमा देते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही अपराध और अपराधियों पर लगाम कसने की दम्भ भर रही है लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट ही है। इन दिनों बेखौफ हो चुके अपराधियों का आतंक बढता ही जा रहा है। जिस पर लगाम लगा पाने में उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस नाकाम साबित हो रही है। वाहवाही लूटने व अपनी पीठ थपथपाने के लिये छोटी-मोटी धर पकड़ पर सराहनीय कार्यों वाली बड़ी-बड़ी का प्रेसनोट जारी करने वाली लखनऊ पुलिस एक बार फिर चोरों व अपराधियों के आगे बेबस नज़र आ रही है। राजधानी में चोरों का आतंक सिर चढ़ कर बोल रहा है। आये दिन चोर पुलिस को चुनौती देते हुए चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला पीजीआई थाना क्षेत्र अन्तर्गत ई-382 रक्षा खण्ड एल्डिको-2 रायबरेली रोड निवासी शैलेन्द्र कुमार सिंह एडवोकेट पुत्र स्व0 राम स्नेही का है। शैलेन्द्र ने अपने घर के बाहर बीती 13 जनवरी की शाम अपनी सफेद रंग की स्कॉर्पियो नम्बर यू0पी0 32 जे0ए0 4729 पार्क की थी। 14 जनवरी की भोर करीब 4:30 बजे जब उन्होंने अपने घर के बाहर देखा तो उनकी स्कॉर्पियो हौसलाबुलंद शातिर चंपत कर चुके थे। पीड़ित शैलेन्द्र ने थाना पीजीआई में लिखित शिकायत दर्ज करायी। पीड़ित लगातार थाने के चक्कर काट रहा है लेकिन स्थानीय पुलिस के हाथ अपराधियों को दबोचने व कर बरामद करने में 48 घण्टे से भी ज़्यादा समय बीतने के बाद भी अब तक खाली ही हैं।
सवाल यह उठता है कि प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का बीड़ा उठाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार जो रही वारदातों को रोकने व इन हौसलाबुलंद अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में नाकाम साबित क्यो हो रही है। क्या इन ताबड़तोड़ वारदातों के बलबूते पर ही योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश को बनायेगी भय मुक्त और अपराध मुक्त। अब देखना यह है कि घर के बाहर खड़े वाहन को चोरी कर पुलिसिया इकबाल को ठेंगा दिखाने वाले शातिरों को हमारी मित्र पुलिस पकड़ने में और वाहन बरामद करने में कामयाब होती है या फिर सिर्फ स्क्रिप्टेड सराहनीय कार्यों के बल बूते पर अपनी पीठ थपठापने में तल्लीन रहेगी।
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